Indicators (सूचक):
वे पदार्थ जिनका उपयोग किसी रासायनिक यौगिक के अनुमापन ( Titration) में, उदासीन बिन्दु या अन्तिम बिन्दु ( End point ) को निर्धारित करने के लिए किया जाता है , उन्हें सूचक कहते हैं।
सूचक के प्रकार-
1. प्राकृतिक सूचक (Natural Indicator)
2. संश्लेषित सूचक (Synthetic Indicator)
3. गंध युक्त सूचक (Olfactory Indicator)
4. अम्लीय सूचक (Acidic Indicator)
5. क्षारीय सूचक (Basdic Indicator)
6. सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator)
1. Natural Indicator (प्राकृतिक सूचक):
प्राकृतिक सूचक में निम्न प्रकार सूचक पदार्थ आते हैं। इनका प्रयोग बहुत कम होता है।
लिटमस, लाल पत्ता गोभी, हल्दी, वेनीला, हाइड्रेनजिया,पेटूनिया तथा जेरानियम जैसे फूलों की पत्तियाँ, आदि।
1. प्राकृतिक सूचक में लिटमस का प्रयोग अधिक होता है।
2. हल्दी का रंग क्षारकीय माध्यम में लाल - भूरा हो जाता है ।
2. Synthetic Indicator (संश्लेषित सूचक):
व्यापक स्तर पर संश्लेषित सूचक का ही प्रयोग होता है। ये प्रायः आसान और आसानी से रिस्पॉन्स होते हैं। ये निम्न हैं।
1. मिथाइल ऑरेंज( Methoil Orenge):
1. अम्लीय माध्यम में लाल रंग और क्षारीय माध्यम में पीला रंग दर्शाता है।
2. किसी विलयन में अम्लता में कमी हो रही है तो मिथाइल ऑरेंज लाल रंग से नारंगी और अंत में पीले रंग का हो जाता है।
3. अम्लता में वृद्धि होती है तो मिथाइल ऑरेंज ऐसे विलयन के लिए विपरीत प्रभाव उत्पन्न दिखाता है।
4. अम्ल में यह लाल तथा क्षारकीय माध्यम में यह पीला होता है।
2. फेनोल्फथेलिन (Phenolphthalein):
अम्ल-क्षार अनुमापन में सूचक की जगह यह भी बहुत प्रयोग किया जाता है। इसके प्रभाव निम्न हैं।
1. अम्लीय विलयनों में फेनोल्फथेलिन रंगहीन हो जाता है।
2. क्षारकीय विलयनों में फेनोल्फथेलिन गुलाबी हो जाता है।
3. Phenolphthalein पानी में थोड़ा घुलनशील है।
4. प्रयोगों में उपयोग के लिए अल्कोहल में भी घोला जाता है।
5. यह एक दुर्बल अम्ल है, जो विलयन में H+ आयन निकालता है।
6. गैर-आयनित फेनोल्फथेलिन अणु रंगहीन होता है।
7. सल्फोनेशन के कारण केंद्रित सल्फ्यूरिक एसिड में फेनोल्फथेलिन आयन नारंगी लाल होता है।
8. यह थैलिन डाई के रूप में जाने जाने वाले रंगों के वर्ग में आता है।
3. Olfactory Indicators (गंध युक्त सूचक):
ये सूचक अपनी विशिष्ट गन्ध द्वारा अम्ल व क्षार को पहचानने में मदत करते हैं। इसीलिए ये सूचक गन्ध युक्त सूचक कहलाते हैं। इनकी गन्ध अम्लीय व क्षारकीय माध्यम में परिवर्तित हो जाती है।
Ex. वैनिला , प्याज़ व लौंग आदि।
4. अम्लीय सूचक (Acidic Indicator):
वे पदार्थ जिनका अम्लीय विलयन में रंग भिन्न-भिन्न होता है, अम्लीय सूचक कहलाते हैं।
5. क्षारीय सूचक (Basdic Indicator):
वे पदार्थ जो क्षारकीय विलयन में रंग भिन्न-भिन्न होते हैं।
क्षारीय सूचक कहलाते हैं।
6. सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator)
विभिन्न प्रकार के सूचकों को परस्पर एक-दूसरे में मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है , जो हाइड्रोजन आयनों की विभिन्न सान्द्रताओं के सापेक्ष भिन्न-भिन्न रंग प्रदर्शित करता है, इसे ही सार्वत्रिक सूचक कहते हैं।
निष्कर्ष:
अम्ल-क्षार विलयन में सूचक हाइड्रोजन आयन [ H+ ] सान्द्रण अथवा हाइड्रॉक्साइड आयन [ OH- ] सान्द्रण के कारण pH मान के परिवर्तित होने की सूचना, अपने रंग को परिवर्तित कर के देते हैं। अम्ल-क्षारक अनुमापनों में सामान्यत : निम्नलिखित तीन सूचकों का प्रयोग जादा होता है 'लिटमस, मेथिल ऑरेन्ज, तथा फीनॉल्फ्थैलिन'।
इस प्रकार आपसब ने देखा कि किस प्रकार कुछ रासायनिक यौगिक या पदार्थ कैसे अन्य यौगिको कि प्रकृति बताने में उपयोगी हैं। इक्जाम्स में कुछ न कुछ प्रश्न इससे अवश्य पूछे जाते हैं अतः Indicator in chemistry | रसायनिक यौगिक के सूचक ध्यान पूर्वक अध्ययन करें
धन्यवाद।
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FAQ
Qua. मिथाइल ऑरेंज कैसा सूचक है?
Ans. मिथाइल ऑरेंज एक कमजोर अम्ल है जो पानी के संपर्क में आने पर नारंगी तटस्थ अणुओं में टूट जाता है।
अम्लीय परिस्थितियों में संतुलन बाईं ओर होता है।
Qua. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में मिथाइल ऑरेंज मिलाने पर क्या होता है?
Ans. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में मिथाइल ऑरेंज मिलाने पर विलयन का रंग लाल हो जाता है।
Qua. क्या मिथाइल ऑरेंज जहरीला है?
Ans. अगर निगल लिया जाए तो यह घातक हो सकता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जलन के परिणामस्वरूप मतली, उल्टी और दस्त हो सकते हैं। साँस लेना: श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकता है। इस पदार्थ के विषैले गुणों का अभी गहन अध्ययन किया जाना है।

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