Jun 20, 2023

Chemistry Formulas in Hindi || रासायन शास्त्र के महत्वपूर्ण अनुलग्न

जब भिन्न भिन्न  तत्त्वों के दो या दो से अधिक परमाणु  एक निश्चित अनुपात में संयुक्त होकर जुड़ते हैं तो इस रासायनिक अभिक्रिया से एक अणु प्राप्त होता है जिसे रासायनिक यौगिक कहते हैं। इनमें कुछ को उनके प्रारंभिक घटकों में तोड़ा जा सकता है किन्तु कुछ को नहीं तोड़ा जा सकता है। जिनको नही तोड़ा जा सकता उन्हे जटिल यौगिक कहते हैं। नये पदार्थ बनने के उपरांत इनके नाम भी चेंज हो जाते हैं लेकिन अपने मूल नाम से एकदम अलग नही होते। इनके आगे या पीछे कोई पूर्वलग्न या अनुलग्न जुड़ जाता है। इस क्रिया को हम, आगे विस्तार से समझेंगें। यहाँ यौगिक के बाद मे जुड़ने वाले कुछ अनुलग्न संलग्न किए गए हैं। ये इक्जाम्स में बहुत उपयोगी हैं। रसायन शास्त्र के जादातर यौगिको के नाम इन्ही अनुलग्नो से बने होते हैं।

Chemistry Formulas in Hindi || रासायन शास्त्र  के महत्वपूर्ण अनुलग्न


महत्वपूर्ण अनुलग्न:

रासायन विग्यान के वेरिएंट होते हैं। ये किसी यौगिक के बाद में जुड़कर उस यौगिक का एक नया नाम बनाते हैं। 
रसायन शास्त्र में इनका बहुत योगदान है।
ये अनुलग्न निम्नलिखित हैं। 

1. नाइट्राट  NO2−

2. नाइट्रेट  NO3−

3. सल्फाईट  SO32−

4. सल्फेट  SO42−

5. बाईसल्फेट  HSO4−

6. हैड्रॉक्सीडे  OH−

7. फॉस्फेट  PO43−

8. बाई फॉस्फेट  HPO42−

9. डाईहाइड्रोजन फॉस्फेट H2PO4−

10. साइनाइड  CN−

11. कार्बोनेट  CO32−

12. बाईकार्बोनेट  HCO3−

13. एसीटेट  C2H3O2−

14. हाइपोक्लोराइट  ClO−

15. क्लोराइट  ClO2−

16. क्लोरेट  ClO3−

17. परक्लोरेट  ClO4−

18. ऑक्सालेट  C2O42-

19. परमैंगनेट  MnO4−

20. डाईक्रोमेट  Cr2O72−

21. क्रोमेट  CrO42−

22. परोक्साइड  O22−

23. सुपरऑक्साइड  O2-

24. हाइड्रोजनऑक्सालेट  HC2O4-

रासायन शास्त्र में अनेकों यौगिक हैं जिनके नाम अनुलग्न जोड़कर बनाए गए हैं सबको दिखा पाना मुश्किल है। यहां दिए गए यौगिको के इर्द-गिर्द में जादातर यौगिक, एजुकेशन में प्रयुक्त होते रहते हैं।
इस प्रकार आपसब ने देखा कि रासायनिक यौगिक के नाम कैसे बनाते हैं।  अनुलग्न क्या हैं। उम्मीद है यह कन्टेन्ट आपको अच्छे से समझ में आया होगा।

धन्यवाद।

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                                    त्रिभुज के प्रकार 

FAQ

Qua. मूलानुपाती सूत्र (Empirical Formula) क्या होते हैं? 

Ans. किसी तत्व का वह सरल सूत्र जो तत्व में उपस्थित परमाणुओं की संख्याओं के अनुपात को व्यक्त करता है।मूलानुपाती सूत्र कहलाता है।

Ex. कार्बन (C) और हाइड्रोजन (H) के परमाणुओं की संख्या का सरल अनुपात 1:3 है।अतः एथेन का मूलानुपाती सूत्र CH3 होता है।

Qua. संरचना सूत्र (Structural Formula) क्या होता है?

Ans. रासायनिक यौगिकों के अणुओं की संरचना के ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन को संरचना सूत्र कहते है।

Ex. CH3–CH2–OH   

Qua. पोटैशियम नाइट्रेट का सूत्र क्या होता है?

Ans. KNO3

  

May 26, 2023

Difference between mixture and Compounds in hindi

जब भिन्न भिन्न तत्त्वों के दो या दो से अधिक परमाणु एक निश्चित अनुपात में संयुक्त होकर जुड़ते हैं तो इस रासायनिक अभिक्रिया से एक अणु प्राप्त होता है जिसे रासायनिक यौगिक कहते हैं। इनमें कुछ को उनके प्रारंभिक घटकों में तोड़ा जा सकता है किन्तु कुछ को नहीं तोड़ा जा सकता है। जिनको नही तोड़ा जा सकता उन्हे जटिल यौगिक कहते हैं। नये पदार्थ बनने के उपरांत इनके नाम भी चेंज हो जाते हैं लेकिन अपने मूल नाम से एकदम अलग नही होते। जब रााासायनि पैमाने पर इनको मिलाया जाता है तो इन्हे मिश्रण कहते है। 

Difference between mixture and Compounds in hindi


मिश्रण एंव यौगिक में अंतर तथा इसके प्रकार-

यौगिक:  जब दो या दो से अधिक पदार्थ निश्चित अनुपात में एक साथ मिलाते हैं तो जो नया substance बनता है वह यौगिक कहलाता है।
यौगिक बनाने के लिए तत्वों का रिएक्शन कराना पड़ता  है । तत्वों को रिएक्ट कराने के अनेक तरीके हैं। इन तरीकों का प्रोसेस अलग- अलग होता है। 

मिश्रण: 

जब दो या दो से अधिक तत्वों को अनिश्चित अनुपात में मिलाया जाता है तो जो सलुशन प्राप्त होता है वह मिश्रण कहलाता है। 
मिश्रण में तत्व का अनुपात निश्चित नहीं होता है । मिश्रण को यौगिक की तुलना में आसानी से अलग किया जा सकता है। क्योंकि इसको अलग करने का बहुत ही सरल तरीके हैं। 

समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture):

वह मिश्रण जिसका संगठन सभी जगह समान हो, जो पूर्णतः मिक्स हो समांगी मिश्रण कहलाता है। 
इस विलयन के विभिन्न अवयव अलग-अलग नहीं दिखाई देते हैं।
Ex. नमक का जलीय विलयन, कार्बन डाइऑक्साइड में सल्फर, चीनी और जल का मिश्रण आदि।

विसमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture):

जिस मिश्रण के विभिन्न-विभिन्न भागों का संघटन एक-दूसरे से भिन्न होता है। उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं। 
Ex.
जल और तेल का मिश्रण एक विषमांगी मिश्रण है।


Read more  Ph Scale in hindi

मिश्रण एंव यौगिक के प्रकार :

यौगिक दो प्रकार के होते हैं:
1. अकार्बनिक यौगिक
2. कार्बनिक यौगिक

अकार्बनिक यौगिक : ये वे रासायनिक यौगिक होते हैं जिनमें कार्बन नहीं पाया जाता है।
इस कारण इनमें कार्बन बन्ध का आभाव होता है।

Ex. H2O, H2SO4, Na2SO4, Al2SO4, Kcl etc.

ऑक्साइड(छारक) : इसे बनाने के लिए धातु और ऑक्सीजन को एक साथ संयुक्त किया जाता है। यह स्वाभाविक एंव औधोगिक रूप से बनया जाता है। 
Ex. NaOH, KOH, MgCO3, NaCO3, ZnOH

एसिड (अम्ल): इसका अणु हाइड्रोजन से शुरू होता है । इसे भी निम्न प्रकार से विभाजन किया जाता है।
Ex. H2SO4, Al2SO4, K2SO4, Na2SO4 etc.


हाइड्रोजन और अन्य प्रकार के धातु से बने हाइड्रो एसिड्स, तथा ऑक्साइड्स जो तैयार होता है । वह एक हाइड्रोजाइड प्लस ऑक्सीजन होता है।

लवण (साल्ट): जब अम्लों को, किसी हाइड्रोजन के धातु द्वारा प्रतिस्थापन किया जाता है तो लवण प्राप्त होता है। यदि लवण बनने की बात आती है। 
Ex. NaCl, NH4Cl, Al2Cl etc.

पानी: इसका उपयोग मानव दैनिक जीवन में होता है।उद्योग एंव अनेक तरह के कामों में इसका उपयोग किया जाता है।


कार्बनिक यौगिक : यह कार्बन के द्वारा बना यौगिक होता है। इसलिए कार्बन के यौगिक को कार्बनिक यौगिक कहा जाता है।
ज्यादातर कार्बनिक यौगिक में हाइड्रोजन, ऑक्सीजन तथा विभिन्न प्रकार के तत्व पाये जाते हैं। कार्बन यौगिक हमेशा सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े रहते हैं।
CH4, C2H6, C3H8, COOH, CH3COOH, C2H5COOH, C2H5OH etc.

कार्बनिक यौगिक का Melting Point और Boiling Point बहुत कम रहता है। इस कारण कार्बनिक यौगिक विधुत के कुचालक होते हैं। ये सभी प्रकार के जीवित प्राणी में पाये जाते हैं। इन्हें कृतिम विधि द्वारा निकाला जा सकता है।

मिश्रण पृथक्करण का तरीका:

मिश्रण पृथक्क़रण के निम्लिखित तरीके हैं। इनका उल्लेख निचे किया गया है-

1. छानना (फिल्टरिंग): इस तरीके द्वारा बहुत ही आसानी से मिश्रण को Filter किया जा सकता है। इस प्रक्रिया द्वारा अघुलनशील ठोस पदार्थ को अलग किया जाता है। Ex. पानी एंव रेत, चाय पत्ती और चाय, खर पतवार और गन्ने का रस आदि।
इसमें अलग करने के लिए एक फ़िल्टर द्वारा मिश्रण को गुजारा जाता है। जिसमे सूक्षम पदार्थ आगे निकल जाता है । जबकि मोटे पदार्थ उसमें अटक जाते हैं। 

2. वाष्पीकरण :  इस तरीके के द्वारा समाग मिश्रण को अलग किया जाता है।
इसमें घोल को गर्म किया जाता है। पानी वाष्प बनकर ऊपर उण जाता है और दूसरा पदार्थ बर्तन में रह जाता है।
Ex. चीनी और पानी का घोल, गन्ने का रस और गुण, खोया और दूध।

3. आसवन :  इस प्रकार के विधि द्वारा पानी एंव स्याही को अलग किया जा सकता है ।

4. क्रोमैटोग्राफी: इस विधि द्वारा विघटित पदार्थो को अलग किया जाता है । इससे रंग तथा स्याही को अलग किया जाता है। 


निष्कर्ष : 
दोस्तों इस पोस्ट में यौगिक, मिश्रण तथा यौगिक के प्रकार , लवण की व्याख्या, तथा मिश्रण पृथकरण करने का तरीका इत्यादि के बारे में जानकारी देने की कोशिस की गई है। ये पाठ्यक्रम के सिलेबस और प्रतियोगितात्मक इक्जाम्स दोनो के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 

धन्यवाद। 


FAQ

Qua. पदार्थ क्या है?
Ans.जिन्हे हम छू सके, फील कर सके अथवा देख सके और जिनका द्रव्यमान हो वे पदार्थ कहलाते हैं। 

Qua. कितने पदार्थ से मिश्रण निर्मित होता है?
Ans. दो पदार्थो से मिश्रण का निर्माण होता है।

Qua. दूध क्या है?
Ans. दूध, एक प्रकार का मिश्रण है।
Qua. पानी तथा चीनी के मिश्रण को किस विधि से अलग करते हैं?
Ans. वाष्पीकरण विधि से। 

Qua. मिक्सचर को हिंदी में क्या बोलते हैं?
Ans. द्रवों, ठोस और गैसों के आपस में मिलाने की क्रिया तथा इस प्रकार उत्पन्न पदार्थों को कहते हैं।





May 1, 2023

PH Scale in hindi

किसी भी रसायन के लिए pH वैल्यू बहुत महत्वपूर्ण है। दैनिक जीवन में भी यह बहुत लाभदायक है। उद्योगों मे बहुतायत रूप से इसका प्रयोग होता है। जल मे घुलनशील अनिष्ट पदार्थों का पता इसी से लगाया जाता है। इसकी महत्ता को देखते हुए आज आपसब को pH वैल्यू के बारे मेें डिटेल से बताया जा रहा है।
PH Scale in hindi

पी एच पैमाना (PH Scale):


किसी विलयन में उपस्थित हाईड्रोजन आयन की सांद्रता जानने के लिए एक स्केल का निर्माण किया गया जिसे pH स्केल कहा जाता है।

पी एच वैल्यू:

pH वैल्यू एक ऐसी संख्या है जो किसी विलयन की अम्लीयता और क्षारीयता को दर्शाती है।

हाईड्रोनियम आयन की सांद्रता जितनी अधिक होगी उस विलयन का pH उतना ही कम होगा।

उदासीन विलयन का पी एच:

किसी उदासीन विलयन के लिए pH का मान 7 होता है।

अम्ल की पी एच वैल्यू:
यदि pH स्केल पर किसी विलयन की pH वैल्यू 7 से कम है तो ये अम्लीय विलयन होगा।

क्षार की पी एच वैल्यू:
यदि pH स्केल पर किसी विलयन की pH वैल्यू 7 से अधिक है तो वह विलयन क्षारीय होगा।

Note- पी एच वैल्यू 7 से 14 तक बढ़ती है। जैसे जैसे विलयन की pH वैलू बढ़ती है उसकी क्षारीय शक्ति (क्षारकता) भी बढ़ती है।

प्रबल अम्ल :

अधिक संख्या में H+ आयन का निर्माण करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं।

दुर्बल अम्ल:
कम संख्या में H+ आयन का निर्माण करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलाते हैं।

दैनिक जीवन में pH का महत्व

(importance of  pH in Everyday life)

1. पौधों एवं जन्तुओं की pH के प्रति संवेदनशीलता:
जीवित प्राणी केवल संकीर्ण pH परास ( परिसर ) में ही जीवित रह सकते हैं । जैविक शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है।

2. अम्लीय वर्षा (Acidic Rain):
बादलों में दूषित हवाओं में मिक्स SO2 के कारण जल का pH कम हो जाता है। फिर यही जल वर्षा के रूप में धरती पर गिरता है इसे अम्लीय वर्षा कहते हैं। इसमें जल का pH 5.6 तक कम हो जाता है।
इससे जलीय जीवधारियों की उत्तरजीविता कठिन हो जाती है। 


3. मृदा की pH वैलू:
मिट्टी की प्रकृति ज्ञात करने के लिए इसका pH परीक्षण करते हैं, इसके बाद इसमें कोई फसल को उगाते हैं। जब मृदा की pH वैलू 7 के निकट होती है तब पौधे उत्तम रूप से विकसित होते हैं, मिट्टी की pH वैलू ज्ञात होने पर विशेष फसल के लिए उर्वरक का चुनाव सरलता से किया जा सकता है। 

4. हमारे पाचन तन्त्र की pH वैलू:
हमारे उदर में पाया जाने वाला HCL पाचन में सहायता करता है । अधिक भोजन कर लेने की स्थिति में उदर अत्यधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न करता है, जिसके कारण उदर में दर्द एवं जलन का अनुभव होता है, एसिडिटी हो जाती है। इसमें pH की रेंज बिगड़ जाती है इस pH रेंज सही करने के लिए मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड ( मिल्क ऑफ मैग्नीशिया,MgOH) को औषधि के रूप में प्रयुक्त करते हैं।
इसे प्रतिअम्ल भी कहते हैं , क्योंकि यह अम्ल के प्रभाव (अम्लता ) को कम कर देती है और अम्ल के आधिक्य मात्रा को उदासीन कर देता है।

5.पशुओं एवं पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा:
जब कीट, जैसे- बर्र, ततैया, चींटी इत्यादि डंक मारते हैं, तो डंक मेें से एक अम्ल डिस्चार्ज करते हैं, इसके कारण ही दर्द एवं जलन का अनुभव होता है। डंक मारे गए अंग पर बेकिंग सोडा (Na2HCO3) जैसे दुर्बल क्षारक को लगाने से आराम मिलता है। 

6. पौधों में pH:
नेटल के पत्तों में डंकनुमा बाल होते हैं,जिसे शरीर में छू जाने पर डंक जैसा दर्द अनुभव होता है। इन बालों में मेथेनॉइक अम्ल का स्राव होता है जो त्वचा में चला जाता जाता है जिसके कारण दर्द का अनुभव होता है। 
इसके उपचार के लिए डंक वाले स्थान पर ढाक पौधे की पत्ती रंगड़कर लगाते हैं। ये पौधे अधिकतर नेटल के पास ही पैदा होते हैं।


दोस्तो इस प्रकार आपसब ने देखा कि किस तरह pH वैली रासायनिक विलयन से लेकर जैविक शरीर तथा मृदा की उपजाऊ शक्ति तक पर को प्रभावित करती है। उम्मीद है यह आपसब को पसंद आया होगा। अगर पसंद आए तो शेयर अवश्य कीजिए। 

धन्यवाद। 


FAQ

Qua. अम्लीय वर्षा क्या है?
Ans. बादलों में दूषित हवाओं में मिक्स SO2 के कारण जल का pH कम हो जाता है। फिर यही जल वर्षा के रूप में धरती पर गिरता है इसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।

Qua. पी एच वैलू कितना बढ़ती है?
Ans. पी एच वैल्यू 7 से 14 तक बढ़ती है। जैसे जैसे विलयन की pH वैलू बढ़ती है उसकी क्षारीगय शक्ति (क्षारकता) भी बढ़ती है।

Qua. प्रबल अम्ल क्या हैं?
Ans. अधिक संख्या में H+ आयन का निर्माण करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं।


Qua. पी एच वैलू पर हाईड्रोनियम आयन का क्या प्रभाव होता है?
Ans. हाईड्रोनियम आयन की सांद्रता जितनी अधिक होगी उस विलयन का pH उतना ही कम होगा।

Apr 22, 2023

Difference between mixture and Compounds in hindi

मिश्रण एंव यौगिक में अंतर तथा इसके प्रकार यौगिक:  जब दो या दो से अधिक पदार्थ निश्चित अनुपात में एक साथ मिलाते हैं तो जो नया substance बनता है वह यौगिक कहलाता है। यौगिक बनाने के लिए तत्वों का रिएक्शन कराना पड़ता  है । तत्वों को रिएक्ट कराने के अनेक तरीके हैं। इन तरीकों का प्रोसेस अलग- अलग होता है। आज आपसब को Difference between mixture and Compounds in hindi के बारे डिटेल मेेें बताऊंगा।
Difference between mixture and Compounds in hindi

मिश्रण एंव यौगिक में अंतर तथा इसके प्रकार:

यौगिक:  जब दो या दो से अधिक पदार्थ निश्चित अनुपात में एक साथ मिलाते हैं तो जो नया substance बनता है वह यौगिक कहलाता है।
यौगिक बनाने के लिए तत्वों का रिएक्शन कराना पड़ता  है । तत्वों को रिएक्ट कराने के अनेक तरीके हैं। इन तरीकों का प्रोसेस अलग- अलग होता है। 

मिश्रण: जब दो या दो से अधिक तत्वों को अनिश्चित अनुपात में मिलाया जाता है तो जो सलुशन प्राप्त होता है वह मिश्रण कहलाता है। मिश्रण में तत्व का अनुपात निश्चित नहीं होता है मिश्रण को यौगिक की तुलना में आसानी से अलग किया जा सकता है 
क्योंकि इसको अलग करने का बहुत ही सरल तरीके हैं। 


                     Indicators in hindi

समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture):

वह मिश्रण जिसका संगठन सभी जगह समान हो, जो पूर्णतः मिक्स हो समांगी मिश्रण कहलाता है। 
इस विलयन के विभिन्न अवयव अलग-अलग नहीं दिखाई देते हैं।
Ex. नमक का जलीय विलयन, कार्बन डाइऑक्साइड में सल्फर, चीनी और जल का मिश्रण आदि।

विसमांगी मिश्रण (Heterogeneous mixture):

जिस मिश्रण के विभिन्न-विभिन्न भागों का संघटन एक-दूसरे से भिन्न होता है। उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं। 
Ex.
जल और तेल का मिश्रण एक विषमांगी मिश्रण है।

मिश्रण एंव यौगिक के प्रकार-

यौगिक दो प्रकार के होते हैं:
1. अकार्बनिक यौगिक
2. कार्बनिक यौगिक

अकार्बनिक यौगिक : ये वे रासायनिक यौगिक होते हैं जिनमें कार्बन नहीं पाया जाता है।
इस कारण इनमें कार्बन बन्ध का आभाव होता है।

Ex. H2O, H2SO4, Na2SO4, Al2SO4, Kcl etc.

ऑक्साइड(छारक) : इसे बनाने के लिए धातु और ऑक्सीजन को एक साथ संयुक्त किया जाता है। यह स्वाभाविक एंव औधोगिक रूप से बनया जाता है। 
Ex. NaOH, KOH, MgCO3, NaCO3, ZnOH

एसिड (अम्ल): इसका अणु हाइड्रोजन से शुरू होता है । इसे भी निम्न प्रकार से विभाजन किया जाता है।
Ex. H2SO4, Al2SO4, K2SO4, Na2SO4 etc.


हाइड्रोजन और अन्य प्रकार के धातु से बने हाइड्रो एसिड्स, तथा ऑक्साइड्स जो तैयार होता है । वह एक हाइड्रोजाइड प्लस ऑक्सीजन होता है।

लवण (साल्ट): जब अम्लों को, किसी हाइड्रोजन के धातु द्वारा प्रतिस्थापन किया जाता है तो लवण प्राप्त होता है। यदि लवण बनने की बात आती है। 
Ex. NaCl, NH4Cl, Al2Cl etc.

पानी: इसका उपयोग मानव दैनिक जीवन में होता है।उद्योग एंव अनेक तरह के कामों में इसका उपयोग किया जाता है।


कार्बनिक यौगिक : यह कार्बन के द्वारा बना यौगिक होता है। इसलिए कार्बन के यौगिक को कार्बनिक यौगिक कहा जाता है।
ज्यादातर कार्बनिक यौगिक में हाइड्रोजन, ऑक्सीजन तथा विभिन्न प्रकार के तत्व पाये जाते हैं। कार्बन यौगिक हमेशा सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े रहते हैं।
CH4, C2H6, C3H8, COOH, CH3COOH, C2H5COOH, C2H5OH etc.

कार्बनिक यौगिक का Melting Point और Boiling Point बहुत कम रहता है। इस कारण कार्बनिक यौगिक विधुत के कुचालक होते हैं। ये सभी प्रकार के जीवित प्राणी में पाये जाते हैं। इन्हें कृतिम विधि द्वारा निकाला जा सकता है।

मिश्रण पृथक्करण का तरीका : 

मिश्रण पृथक्क़रण के निम्लिखित तरीके हैं। इनका उल्लेख निचे किया गया है-

1. छानना (फिल्टरिंग): इस तरीके द्वारा बहुत ही आसानी से मिश्रण को Filter किया जा सकता है। इस प्रक्रिया द्वारा अघुलनशील ठोस पदार्थ को अलग किया जाता है। Ex. पानी एंव रेत, चाय पत्ती और चाय, खर पतवार और गन्ने का रस आदि।
इसमें अलग करने के लिए एक फ़िल्टर द्वारा मिश्रण को गुजारा जाता है। जिसमे सूक्षम पदार्थ आगे निकल जाता है । जबकि मोटे पदार्थ उसमें अटक जाते हैं। 

2. वाष्पीकरण :  इस तरीके के द्वारा समाग मिश्रण को अलग किया जाता है।
इसमें घोल को गर्म किया जाता है। पानी वाष्प बनकर ऊपर उण जाता है और दूसरा पदार्थ बर्तन में रह जाता है।
Ex. चीनी और पानी का घोल, गन्ने का रस और गुण, खोया और दूध।

3. आसवन :  इस प्रकार के विधि द्वारा पानी एंव स्याही को अलग किया जा सकता है ।

4. क्रोमैटोग्राफी: इस विधि द्वारा विघटित पदार्थो को अलग किया जाता है । इससे रंग तथा स्याही को अलग किया जाता है। 


निष्कर्ष : दोस्तों इस पोस्ट में यौगिक, मिश्रण तथा यौगिक के प्रकार , लवण की व्याख्या, तथा मिश्रण पृथकरण करने का तरीका इत्यादि के बारे में जानकारी देने की कोशिस की गई है। ये पाठ्यक्रम के सिलेबस और प्रतियोगितात्मक इक्जाम्स दोनो के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 

धन्यवाद। 


FAQ

Qua. पदार्थ क्या है?
Ans.जिन्हे हम छू सके, फील कर सके अथवा देख सके और जिनका द्रव्यमान हो वे पदार्थ कहलाते हैं। 

Qua. कितने पदार्थ से मिश्रण निर्मित होता है?
Ans. दो पदार्थो से मिश्रण का निर्माण होता है।

Qua. दूध क्या है?
Ans. दूध, एक प्रकार का मिश्रण है।
Qua. पानी तथा चीनी के मिश्रण को किस विधि से अलग करते हैं?
Ans. वाष्पीकरण विधि से। 

Apr 17, 2023

Chemistry Formulas in Hindi || रासायन शास्त्र के महत्वपूर्ण अनुलग्न

जब भिन्न भिन्न  तत्त्वों के दो या दो से अधिक परमाणु  एक निश्चित अनुपात में संयुक्त होकर जुड़ते हैं तो इस रासायनिक अभिक्रिया से एक अणु प्राप्त होता है जिसे रासायनिक यौगिक कहते हैं। इनमें कुछ को उनके प्रारंभिक घटकों में तोड़ा जा सकता है किन्तु कुछ को नहीं तोड़ा जा सकता है। जिनको नही तोड़ा जा सकता उन्हे जटिल यौगिक कहते हैं। नये पदार्थ बनने के उपरांत इनके नाम भी चेंज हो जाते हैं लेकिन अपने मूल नाम से एकदम अलग नही होते। इनके आगे या पीछे कोई पूर्वलग्न या अनुलग्न जुड़ जाता है। इस क्रिया को हम, आगे विस्तार से समझेंगें। यहाँ यौगिक के बाद मे जुड़ने वाले कुछ अनुलग्न संलग्न किए गए हैं। ये इक्जाम्स में बहुत उपयोगी हैं। रसायन शास्त्र के जादातर यौगिको के नाम इन्ही अनुलग्नो से बने होते हैं।

Chemistry Formulas in Hindi


महत्वपूर्ण अनुलग्न:

रासायन विग्यान के वेरिएंट होते हैं। ये किसी यौगिक के बाद में जुड़कर उस यौगिक का एक नया नाम बनाते हैं। 
रसायन शास्त्र में इनका बहुत योगदान है।
ये अनुलग्न निम्नलिखित हैं। 

1. नाइट्राट  NO2−       

2. नाइट्रेट  NO3−

3. सल्फाईट  SO32−

4. सल्फेट  SO42−

5. बाईसल्फेट  HSO4−

6. हैड्रॉक्सीडे  OH−

7. फॉस्फेट  PO43−

8. बाई फॉस्फेट  HPO42−

9. डाईहाइड्रोजन फॉस्फेट H2PO4−

10. साइनाइड  CN−         कार्बन एक परिचय 

11. कार्बोनेट  CO32−

12. बाईकार्बोनेट  HCO3−

13. एसीटेट  C2H3O2−

14. हाइपोक्लोराइट  ClO−

15. क्लोराइट  ClO2−

16. क्लोरेट  ClO3−

17. परक्लोरेट  ClO4−

18. ऑक्सालेट  C2O42-

19. परमैंगनेट  MnO4−

20. डाईक्रोमेट  Cr2O72−

21. क्रोमेट  CrO42−

22. पैरोक्साइड  O22−

23. सुपरऑक्साइड  O2-

24. हाइड्रोजनऑक्सालेट  HC2O4-


रासायन शास्त्र में अनेकों यौगिक हैं जिनके नाम अनुलग्न जोड़कर बनाए गए हैं सबको दिखा पाना मुश्किल है। यहां दिए गए यौगिको के इर्द-गिर्द में जादातर यौगिक, एजुकेशन में प्रयुक्त होते रहते हैं।
इस प्रकार आपसब ने देखा कि रासायनिक यौगिक के नाम कैसे बनाते हैं। अनुलग्न क्या हैं। उम्मीद है यह कन्टेन्ट आपको अच्छे से समझ में आया होगा।

धन्यवाद। 


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                     Indicators in chemistry 
                          Types of Triangles 

FAQ

Qua. मूलानुपाती सूत्र (Empirical Formula) क्या होते हैं? 
Ans. किसी तत्व का वह सरल सूत्र जो तत्व में उपस्थित परमाणुओं की संख्याओं के अनुपात को व्यक्त करता है।
मूलानुपाती सूत्र कहलाता है।
Ex. कार्बन (C) और हाइड्रोजन (H) के परमाणुओं की संख्या का सरल अनुपात 1:3 है।
अतः एथेन का मूलानुपाती सूत्र CH3 होता है।

Qua. संरचना सूत्र (Structural Formula) क्या होता है?
Ans. रासायनिक यौगिकों के अणुओं की संरचना के ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन को संरचना सूत्र कहते है।
Ex. CH3–CH2–OH   


Qua. पोटैशियम नाइट्रेट का सूत्र क्या होता है?
Ans. KNO3


Apr 9, 2023

Magnetic Effect Of Electric Current || विधुत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

चुंबक को कुंडली की ओर ले जाने पर कुंडली के परिपथ में विद्युत धरा उत्पन्न होती है, जिसे गैल्वेनोमीटर की सुई के विक्षेप द्वारा इंगित किया जाता है। कुंडली के सापेक्ष चुंबक की गति एक प्रेरित विभवांतर उत्पन्न करती है, जिसके कारण परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा प्रवाहित होती है। इसे विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव कहते हैं। हाईस्कूल और विग्यान के नालेज के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण है। अतः आज आपसब को Magnetic Effect Of Electric Current |विधुत धारा का चुम्बकीय प्रभाव के बारे मेें विस्तार से बताऊंगा।

Magnetic Effect Of Electric Current


चुंबकीय पदार्थ ( Magnetic Substances):

पदार्थ जिन्हें चुबंक आकर्षित करता है, चुंबकीय पदार्थ कहलाते है।
जैसे- लोहा, कोबाल्ट, निकेल आदि।

चुंबक ( Magnet ): चुंबक वह पदार्थ है जो लौह धातु अथवा लौह धातु की बनी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। चुंबक के सिरे के निकट का वह बिंदु जहाँ चुंबक का आकर्षण बल अधिकतम होता है, ध्रुव कहलाता है। चुंबक को स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर यह उत्तर और दक्षिण दिशा में रुकता है जो ध्रुव उत्तर दिशा की ओर होता है, उत्तरी ध्रुव तथा जो दक्षिण की ओर होता है दक्षिणी ध्रुव कहलाता है। दोनों ध्रुवों को मिलनेवाली रेखा को चुंबकीय अक्ष कहा जाता है।

Note- सजातीय चुंबक एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और विजातीय चुंबक एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

अचुंबकीय पदार्थ (Non magnetic Substances): वे पदार्थ जिन्हें चुंबक आकर्षित नहीं करता, अचुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं। 
जैसे- काँच, कागज, पीतल इत्यादि।

                      Acid, Bases and Salts
                      Time and Distance 

चुंबकीय क्षेत्र ( Magnetic field ): 

चुंबक द्वारा उत्पन्न वह क्षेत्र जिसमें किसी चुंबकीय पदार्थ को ले जाने पर वह अपनी ओर आकर्षित करने लगता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। चुंबकीय क्षेत्र को चुंबकीय बल रेखाओं द्वारा दर्शाया जाता है।
Magnetic Effect Of Electric Current

विधुत धारा द्वारा चुंबकीय क्षेत्र उत्त्पन्न होना:

1820 मेें ओर्स्टेड नामक वैज्ञानिक ने अपने प्रयोग से पता लगाया कि जब किसी चालक से विधुत-धारा प्रभावित की जाती है तब चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

चुंबकीय क्षेत्र-रेखाओं के गुण: 

• किसी चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र-रेखाएँ एक सतत बंद वक्र होती हैं। 

• ये रेखाएं उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कराती है और पुन: चुंबक के भीतर होती हुई उत्तरी ध्रुव पर वापस आ जाती हैं।  

• ध्रुवों के समीप क्षेत्र-रेखाएँ घनी होती है परंतु ज्यो-ज्यो उनकी दूरी ध्रुवों से बढ़ती है, उनका घनत्व घटता जाता है।

• क्षेत्र-रेखा के किसी बिंदु पर खीची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर उस क्षेत्र की दिशा बताती है।

• क्षेत्र-रेखाओं की निकटता बढ़ने से चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता बढ़ती है। 

• चुंबकीय क्षेत्र-रेखाएँ एक दूसरे को कभी नहीं काटती हैं।

मैक्सवेल का दक्षिण-हस्त नियम ( Maxwell’s right-hand rule ) 

यदि धारावाही तार को दाएँ हाथ की मुट्ठी में इस प्रकार पकड़ा जाए कि अंगूठा धारा की दिशा की ओर संकेत करता हो तो हाथ की अन्य अँगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करेगी।
Magnetic Effect Of Electric Current


धारावाही वृताकार तार के कारण चुंबकीय क्षेत्र: 

ताँबे का एक मोटा तार लेकर उसे वृताकार रूप में मोड़ कर धारा प्रवाहित करने पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्पन्न होती हैं। वे कुछ निम्न प्रकार दिखाई देती हैं। 8




परिनालिका ( Solenoid ) – जब एक लंबे विधुतरोधित चालक तार को सर्पिल रूप में इस प्रकार लपेटा जाता है कि तार के फेरे एक दूसरें से अलग, परंतु अगल-बगल हों, तो इस प्रकार की व्यवस्था को परिनालिका कहते हैं। 

विधुत-चुंबक ( Electromagnet ):

विधुत-चुंबक ऐसा चुंबक है जिसमें चुंबकत्व उतने ही समय तक विद्यमान रहता है जितने समय तक परिनालिका में विधुत-धारा प्रवाहित होती रहती है। ऐसा विधुत-चुंबक बनाने के लिए एक नरम लोहे के छड को परिनालिका में रखा जाता है।

विधुत-चुंबक की तीव्रता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है-

• विधुत-धारा का परिमाण जितना अधिक होगा चुंबकत्व भी अधिक होगा। 

• परिनालिका में फेरों की संख्या अधिक होने पर चुंबकत्व अधिक होगा। 

• क्रोड के पदार्थ की प्रकृति जैसी होगी चुम्बकत्व भी वैसा होगा। 

धारावाही चालक पर चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव- 

• जब एक धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो उसपर एक बल लगता है।

• 'बल की दिशा', चुंबकीय क्षेत्र की दिशा तथा विधुत-धारा की दिशा, दोनों पर निर्भर करती है।

फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम ( Fleming’s left-hand rule ):

यदि हम अपने बाएँ हाथ की तीन अँगुलियों 'मध्यमा, तर्जनी तथा अंगूठे' को परस्पर लंबवत फैलाएँ और यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा तथा मध्यमा धारा की दिशा को दर्शाये तब अँगूठा, धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा को व्यक्त करता है।

विधुत मोटर ( Electric motor ):

विधुत मोटर ( Electric motor ): विधुत मोटर में एक शक्तिशाली चुंबक होता है। इसके अवतल ध्रुव खण्डों के बीच ताँबे के तार की कुंडली होती है जिसे आर्मेचर कहते हैं। आर्मेचर के दोनों छोर पीतल के खंडित वलयों के बने होते हैं जो R1 तथा R2 से जुड़े होते हैं। इनपे कार्बन के दो बुश B1 तथा B2 लगे होते हैं जो आर्मेचर को स्पर्श करते रहते हैं। जब आर्मेचर से धारा प्रवाहित की जाती है तब चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र के कारण कुंडली के भुजाओं पर समान मान के किंतु विपरीत दिशाओं में बल लगते हैं इस बल के कारण आर्मेचर घूर्णन करने लगता है।



Note- विधुत मोटर एक ऐसा यंत्र है जिसके द्वारा विधुत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

विधुत-चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction):

जब किसी ताँबे के तार की बंद लूप के दोनों सिरों से एक गैल्वेनोमीटर जोड़कर एक छड-चुंबक के किसी एक सिरे को तेजी से उसकी ओर लाए, तो गैल्वेनोमीटर के संकेतक का विक्षेप होता है जिससे पता चलता है कि लूप में धारा का प्रवाह हो रहा है।

Note- लूप में विधुत-धारा उतने ही समय तक प्रवाहित होती है, जब तक कि लूप तथा चुंबक के बीच आपेक्षित गति बनी रहती है।

फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम ( Fleming’s right-hand rule ):

यदि दाहिने हाथ का अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा परस्पर समकोणिय तरीके से इस प्रकार रखे गए हो कि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को संकेत करती हो और आँगूठा गति की दिशा में हो तो, मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा की ओर संकेत करेगी।


Read more Unit conversion 

विधुत जनित्र ( Electric Generator ): 

विधुत जनित्र में एक शक्तिशाली चुंबक होता है, जिसके बीच एक ताँबे के तार की कुंडली को तेजी से घुमाया जाता है। कुंडली के तार के दोनों छोर पर ताँबे के विभक्त वलय C1 तथा C2 लगे रहते हैं। इन वलयों को कार्बन ब्रुश B1 तथा B2 स्पर्श करते रहते हैं। कुंडली के घूर्णन और विभक्त वलय द्वारा प्रेरित धारा की दिशा में परिवर्तन के कारण प्रतिरोधक R में लगातार एक ही दिशा में विधुत-धारा प्रवाहित होती रहती है। इसी धारा को दिष्ट-धारा (Direct Current) कहते हैं। जो इसे प्रोड्यूस करता हो उस जनित्र को डायानेमों या दिष्ट धारा जनित्र कहते हैं। 

Note- यदि विभक्त वलयों के स्थान पर सर्पी वलयों को लगा दिया जाए तो प्रत्येक अर्ध धूर्णन के बाद धारा की दिशा बदल जाएगी, इस प्रकार की धारा को प्रत्यावर्ती धारा ( Alternative Current ) कहते हैं। इस प्रकार के जनित्र को प्रत्यावर्ती धारा जनित्र करते हैं।

घरों में उपयोग की जानेवाली बिजली- हमारे घरों में जो विधुत आपूर्ति की जाती है वह 220 V पर प्रत्यावर्ती धारा होती है जिसकी आवृति 50 Hz होती है। इसे मेनलाइन पावर कहा जाता है। जिस तार से यह आपूर्ति होती है, उसे मेन्स वायर या मेन्स कहते हैं। मेन्स के दो तार होते हैं एक से 5 A तक की धारा प्रवाहित होती है तथा दूसरें से 15 A तक की धारा प्रवाहित की जाती है।

घरेलू वायरिंग की संरचना- पावरहाउस से ट्रांसफाॅर्मर की सहायता से विधुत को विधुत पोलों से केबल के द्वारा घरों तक पहुँचाया जाता है। इसमें एक विधुन्मय तार होता है जो लाल रंग के विधुतरोधी पदार्थ से ढँका होता है। दूसरा उदासीन तार होता है जो काले रंग के विद्दुतरोधी पदार्थ से कवर्ड होता है। घरों में एक तीसरा तार भी होता है जिसे भू-तार कहते हैं जो हरें रंग के विधुतरोधी पदार्थ से कवर्ड होता है। 

अतिभारण ( Overloading )- 

विधुत परिपथ में इस्तेमाल होनेवाले तारों का चयन उनमें प्रवाहित होने वाली धारा के परिमाण के महत्तम मान पर निर्भर करता है। यदि उपकरणों की कुल शक्ति इस स्वीकृत सीमा से अधिक हो जाती है तो इसे अतिभारण कहा जाता है।

लघुपथन ( Short-circuiting ): 

कभी-कभी तारों के विद्दुतरोधी परत के खराब या क्षतिग्रस्त हो जाने पर वे आपस में संपर्क (टच) हो जाते हैं। ऐसा होने पर परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है और परिपथ में बहुत अधिक धारा प्रवाहित होने लगाती है। इससे बहुत तीव्र स्पार्क उत्पन्न होता है तथा परिपथ का ताप बहुत बढ़ जाता है। वायर गल जाते हैं। इसे लघुपथन कहते हैं। 

फ्यूज ( Fuse ): 

फ्यूज ऐसे तार का एक टुकड़ा होता है जिसके पदार्थ की प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है तथा गलनांक बहुत कम होता है। विधुत फ्यूज, विधुत परिपथ के बचाव के लिए सबसे आवश्यक सुरक्षा युक्ति है। जब परिपथ में अतिभारण या लघुपथन के कारण या मेन्स में वोल्टता की सीमा बढ़ जाने पर धारा का प्रवाह तेजी से होने लगता है तो धारा से उत्पन्न ऊष्मा के कारण फ्यूज का तार पिघल जाता है और परिपथ भंग हो जाता है। इससे भावी संकट से बचाव हो जाता है।

विधुत के उपयोग से संबंद्ध सावधानियाँ- 

विधुत के उपयोग से संबंद्ध सावधानियाँ- 

• स्विचों प्लगों सँकटों तथा जोड़ा पर सभी संबंधन अच्छी तरह से होने चाहिए

• विधुत-परिपथ में कोई मरम्मत करते समय दस्ताने और जूता पहनना चाहिए |

• स्विच, प्लगों सँकटों तार आदि अच्छे किस्म के होने चाहिए

• परिपथ में आग लगने या अन्य किसी दुर्घटना से बचने के लिए MCV लगवाना चाहिए | 

• परिपथ में लगे फ्यूज उपयुक्त क्षमता तथा पदार्थ के बने होने चाहिए | 


• यदि कोई व्यक्ति विधुन्मय तार के सीधे संपर्क में आ जाता है ओत उसे किसी विधुतरोधी

इस प्रकार हमने विधुत परिपथ, विद्युत क्षेत्र, विद्युत का उपयोग आदि के बारे में बिस्तार समझा। उम्मीद है आपलोग इस चैप्टर को आसान भाषा में समझ पाए होगें। अपने जान पहचान के अन्य विद्यार्थीगण के साथ भी इसे शेयर करें। 

धन्यवाद ।

FAQ

Qua. चुंबक क्या है?

Ans. चुंबक एक नरम लोहे का स्वरूप है, इसमें आकर्षित करने के गुण उपस्थित होते हैं। यह लोहे को आकर्षित करता है।


Qua. विधुत परिपथ भंग क्या होता है?

Ans. जब विधुत परिपथ में अधिक धारा प्रवाहित होने लगती है तो विधुत परिपथ भंग हो जाता है और परिपथ धारा रुक जाती है।

Qua. अतिभारण (Overloading) क्या होता है?

Ans. विधुत परिपथ में इस्तेमाल होनेवाले तारों का चयन उनमें प्रवाहित होने वाली धारा के परिमाण के महत्तम मान पर निर्भर करता है। यदि उपकरणों की कुल शक्ति इस स्वीकृत सीमा से अधिक हो जाती है तो इसे अतिभारण कहा जाता है।


Qua. घरों में उपयोग की जानेवाली बिजली कैसी होती है?

Ans. हमारे घरों में जो विधुत आपूर्ति की जाती है वह 220 V पर प्रत्यावर्ती धारा होती है जिसकी आवृति 50 Hz होती है।


Qua. विधुत मोटर का कार्य क्या होता है?

Ans. विधुत मोटर एक ऐसा यंत्र है जिसके द्वारा विधुत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।  


Apr 2, 2023

Indicator in chemistry | रसायनिक यौगिक के सूचक

रसायन शास्त्र में बहुतायत यौगिक ऐसे हैं जिनके रंग और गुण एकसमान प्रतीत होते हैं। अनेक यौगिक तो ऐसे हैं जो एक से गुण रखते हुए भी भिन्न-भिन्न होते हैं। रसायनिक यौगिक को उनके गुणों और रंगो के आधार पर पहचान करना संभव नहीं है इसलिए इन्हे रासायनिक क्रियाओं द्वारा पहचाना जाता है। सभी यौगिको को रासायनिक क्रियाओं द्वारा वेरीफाई करना संभव नही है क्योकि ये प्रोसेस लम्बी है अतः कुछ ऐसे रसायन डेवलप किए गए हैं जिन्हे बहुत थोड़ा सा (जिस यौगिक की पहचान करनी है) मेें एड करते हैं तो पता चल जाता है कि वह कौन सा यौगिक है। यौगिको की पहचान कराने वाले ये रसायन ही सूचक (Indicators) कहलाते हैं। इस कड़ी में Indicator in chemistry | रसायनिकख यौगिक के सूचक चैप्टर बहुत हेल्पफुल होगा।
Indicator in chemistry

Indicators (सूचक):

वे पदार्थ जिनका उपयोग किसी रासायनिक यौगिक के अनुमापन ( Titration) में, उदासीन बिन्दु या अन्तिम बिन्दु ( End point ) को निर्धारित करने के लिए किया जाता है , उन्हें सूचक कहते हैं।

सूचक के प्रकार-

1. प्राकृतिक सूचक (Natural Indicator) 

2. संश्लेषित सूचक (Synthetic Indicator)
  
3. गंध युक्त सूचक (Olfactory Indicator)

4. अम्लीय सूचक (Acidic Indicator)

5. क्षारीय सूचक (Basdic Indicator)

6. सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator)

1. Natural Indicator (प्राकृतिक सूचक):

प्राकृतिक सूचक में निम्न प्रकार सूचक पदार्थ आते हैं। इनका प्रयोग बहुत कम होता है।
लिटमस, लाल पत्ता गोभी, हल्दी, वेनीला, हाइड्रेनजिया,पेटूनिया तथा जेरानियम जैसे फूलों की पत्तियाँ, आदि।
1. प्राकृतिक सूचक में लिटमस का प्रयोग अधिक होता है।
2. हल्दी का रंग क्षारकीय माध्यम में लाल - भूरा हो जाता है ।

2. Synthetic Indicator (संश्लेषित सूचक):

व्यापक स्तर पर संश्लेषित सूचक का ही प्रयोग होता है। ये प्रायः आसान और आसानी से रिस्पॉन्स होते हैं। ये निम्न हैं। 


1. मिथाइल ऑरेंज( Methoil Orenge):
1. अम्लीय माध्यम में लाल रंग और क्षारीय माध्यम में पीला रंग दर्शाता है। 
2. किसी विलयन में अम्लता में कमी हो रही है तो मिथाइल ऑरेंज लाल रंग से नारंगी और अंत में पीले रंग का हो जाता है।
3. अम्लता में वृद्धि होती है तो मिथाइल ऑरेंज ऐसे विलयन के लिए विपरीत प्रभाव उत्पन्न दिखाता है।
4. अम्ल में यह लाल तथा क्षारकीय माध्यम में यह पीला होता है।

2. फेनोल्फथेलिन (Phenolphthalein):
अम्ल-क्षार अनुमापन में सूचक की जगह यह भी बहुत प्रयोग किया जाता है। इसके प्रभाव निम्न हैं। 
1. अम्लीय विलयनों में फेनोल्फथेलिन रंगहीन हो जाता है।
2. क्षारकीय विलयनों में फेनोल्फथेलिन गुलाबी हो जाता है।
3. Phenolphthalein पानी में थोड़ा घुलनशील है। 
4. प्रयोगों में उपयोग के लिए अल्कोहल में भी घोला जाता है। 
5. यह एक दुर्बल अम्ल है, जो विलयन में H+ आयन निकालता है। 
6. गैर-आयनित फेनोल्फथेलिन अणु रंगहीन होता है। 
7. सल्फोनेशन के कारण केंद्रित सल्फ्यूरिक एसिड में फेनोल्फथेलिन आयन नारंगी लाल होता है। 
8. यह थैलिन डाई के रूप में जाने जाने वाले रंगों के वर्ग में आता है। 

3. Olfactory Indicators (गंध युक्त सूचक):

ये सूचक अपनी विशिष्ट गन्ध द्वारा अम्ल व क्षार को पहचानने में मदत करते हैं। इसीलिए ये सूचक गन्ध युक्त सूचक कहलाते हैं। इनकी गन्ध अम्लीय व क्षारकीय माध्यम में परिवर्तित हो जाती है।
 Ex. वैनिला , प्याज़ व लौंग आदि। 

4. अम्लीय सूचक (Acidic Indicator):
वे पदार्थ जिनका अम्लीय विलयन में रंग भिन्न-भिन्न होता है, अम्लीय सूचक कहलाते हैं। 

5. क्षारीय सूचक (Basdic Indicator):
वे पदार्थ जो क्षारकीय विलयन में रंग भिन्न-भिन्न होते हैं।  
क्षारीय सूचक कहलाते हैं।

6. सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator)
विभिन्न प्रकार के सूचकों को परस्पर एक-दूसरे में मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है , जो हाइड्रोजन आयनों की विभिन्न सान्द्रताओं के सापेक्ष भिन्न-भिन्न रंग प्रदर्शित करता है, इसे ही सार्वत्रिक सूचक कहते हैं।

निष्कर्ष:
अम्ल-क्षार विलयन में सूचक हाइड्रोजन आयन [ H+ ] सान्द्रण अथवा हाइड्रॉक्साइड आयन [ OH- ] सान्द्रण के कारण pH मान के परिवर्तित होने की सूचना, अपने रंग को परिवर्तित कर के देते हैं। अम्ल-क्षारक अनुमापनों में सामान्यत : निम्नलिखित तीन सूचकों का प्रयोग जादा होता है 'लिटमस, मेथिल ऑरेन्ज, तथा फीनॉल्फ्थैलिन'।
इस प्रकार आपसब ने देखा कि किस प्रकार कुछ रासायनिक यौगिक या पदार्थ कैसे अन्य यौगिको कि प्रकृति बताने में उपयोगी हैं। इक्जाम्स में कुछ न कुछ प्रश्न इससे अवश्य पूछे जाते हैं अतः Indicator in chemistry | रसायनिक यौगिक के सूचक  ध्यान पूर्वक अध्ययन करें 

धन्यवाद। 

                     समबाहु त्रिभुज 
       
           

FAQ

Qua. मिथाइल ऑरेंज कैसा सूचक है?
Ans. मिथाइल ऑरेंज एक कमजोर अम्ल है जो पानी के संपर्क में आने पर नारंगी तटस्थ अणुओं में टूट जाता है।
अम्लीय परिस्थितियों में संतुलन बाईं ओर होता है।

Qua. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में मिथाइल ऑरेंज मिलाने पर क्या होता है?
Ans. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में मिथाइल ऑरेंज मिलाने पर विलयन का रंग लाल हो जाता है। 


Qua. क्या मिथाइल ऑरेंज जहरीला है?
Ans. अगर निगल लिया जाए तो यह घातक हो सकता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जलन के परिणामस्वरूप मतली, उल्टी और दस्त हो सकते हैं। साँस लेना: श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकता है। इस पदार्थ के विषैले गुणों का अभी गहन अध्ययन किया जाना है।

Chemistry Formulas in Hindi || रासायन शास्त्र के महत्वपूर्ण अनुलग्न

जब भिन्न भिन्न  तत्त्वों के दो या दो से अधिक परमाणु  एक निश्चित अनुपात में संयुक्त होकर जुड़ते हैं तो इस रासायनिक अभिक्रिया से एक अणु प्राप्...